NCERT recommendation on textbooks : क्या अब स्कूली किताबों में INDIA की जगह पढ़ाया जाएगा ‘भारत’, NCERT पैनल ने की सिफारिश

NCERT recommendation on textbooks : G20 समिट 2023 के समय देश का नाम बदलने की खूब चर्चा हुई। कहा गया कि India की जगह ‘भारत’ लिखा जाएगा। राष्ट्रपति ने G20 के न्‍योते में India की जगह भारत लिखकर भेजा। अब स्कूली किताबों में देश का नाम बदलने की सिफारिश की गई है। नैशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) की हाई लेवल कमिटी ने यही सिफारिश की है। कमिटी के चेयरपर्सन सीआई आइजैक ने हिंदुस्‍तान टाइम्‍स से कहा कि स्‍कूली करिकुलम में India को हटाकर ‘Bharat’ किया जाना चाहिए। एक और सिफारिश की गई है कि करिकुलम से एंश‍ियंट हिस्ट्री को बाहर कर उसकी जगह ‘क्‍लासिकल हिस्ट्री’ पढ़ाई जाए।

भारत है देश का प्राचीन नाम’

NCERT recommendation on textbooks : आइजैक ने कहा कि सात सदस्यों वाली समिति ने एकमत से यह सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि ‘भारत युगों पुराना नाम है। भारत नाम का इस्तेमाल विष्णु पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में मिलता है जो 7,000 साल पुराना है।’ आइजैक ने कहा, ‘इंडिया शब्द का प्रयोग आमतौर पर ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना और 1757 में प्लासी के युद्ध के बाद ही किया जाने लगा।’ इसलिए कमिटी ने सर्वसम्मति से सुझाव दिया है कि सभी कक्षाओं की किताबों में India की जगह भारत नाम यूज किया जाए।

प्राचीन इतिहास’ के बजाय पढ़ाया जाएगा ‘शास्त्रीय इतिहास…

NCERT recommendation on textbooks : आइजैक ने कहा कि बताया कि NCERT ने 2021 में विभिन्न विषयों पर पेपर तैयार करने के लिए 25 समितियां बनाई थीं। उनकी समिति भी इन्‍हीं में से एक है। इस समिति ने पाठ्यपुस्तकों में ‘प्राचीन इतिहास’ के बजाय ‘शास्त्रीय इतिहास’ को शामिल करने की सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि ‘अंग्रेजों ने भारतीय इतिहास को तीन चरणों में विभाजित किया – प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक जिसमें भारत को अंधकार में दिखाया गया, वैज्ञानिक ज्ञान और प्रगति से अनभिज्ञ दिखाया गया। हालांकि, उस युग में भारत की उपलब्धियों के कई उदाहरणों में आर्यभट्ट का सौर मंडल मॉडल पर काम शामिल है।’

NCERT recommendation on textbooks : आइजैक ने कहा, ‘इसलिए, हमने सुझाव दिया है कि भारतीय इतिहास के शास्त्रीय काल को मध्यकालीन और आधुनिक काल के साथ स्कूलों में पढ़ाया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि समिति ने पाठ्यपुस्तकों में ‘हिंदू विजयों’ को हाईलाइट करने की भी सिफारिश की है। आइजैक भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (ICHR) के सदस्य भी हैं। इसके अलावा, समिति ने सभी विषयों के पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) को शामिल करने की भी सिफारिश की है।

पहले भी हो चुके हैं कई बड़े बदलाव…

साल 2022 में एनसीईआरटी (NCERT) ने बड़ा कदम उठाया था जब सिलेबस से 33 प्रतिशत हिस्से को हटा दिया गया था।

इसे सिलेबस रेशनलाइजेशन कहा गया और इसके तहत गुजरात दंगे, मुगल कोर्ट, इमरजेंसी, कोल्ड वॉर, नक्सली आंदोलन जैसे विषयों को सिलेबस से हटा दिया गया था।

एनसीईआरटी ने नेशनल क्यूरीकुलम फ्रेमवर्क को भी कई बार रिवाइज किया. ये बदलाव साल 1975, 1988, 2000 और 2005 में किए गए.
एनसीईआरटी का कहना था कि जो हिस्से उन्होंने हटाए वे नई एजुकेशन पॉलिसी के साथ एलाइन होने के लिए हटाए

पुराने हिस्से हटाकर (जिन्हें आउटडेटेड कहा गया), नये हिस्से जोड़े गए, जिनमें मुख्य हैं – जीएसटी, डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ आदि

हिस्ट्री से मुगल अंपायर, सिविक्स से कोल्ड वॉर एरा, इंडियन पॉलिटिक्स से ‘राइज़ ऑफ पॉपुलर मूवमेंट्स’, ‘एरा ऑफ वन पार्टी डोमिनेंस’ जैसे चैप्टर्स को हटाया गया

इसके अलावा भी कई विवादास्पद मुद्दे जैसे गांधी जी की हत्या के बाद आरएसएस पर बैन, नाथूराम गोडसे के बैकग्राउंड का रिफ्रेंस आदि देने वाले हिस्सों को हटाया गया। बता दें कि ये जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है।

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